Friday, September 30, 2011

समय




बाइ वन गेट टू हो गया है समय
दो बातों की एक बात
रिचार्ज के साथ टॉप अप
एडवाइज के साथ कमीशन अंडर स्‍टूड है.

बहुत कुछ वह नहीं है इस समय में
जो दिखाई देता है
मसलन, रोजगार की गारंटी में
शामिल नहीं है वेतन की गारंटी
सेलेरी का मिलना जैक पॉट लगना भी हो सकता है.
यह भी हो सकता है कि
खेतों में कुंए और जंगलों में
तालाब खोदता आदमी
बकाये वेतन का तगादा कर रहा हो. 

बहुत कुछ बदला हुआ है इस समय में
यहां अपडेट आदमी को अप टू डेट कहा जाता है
और अप टू डेट को आउट डेटेड.

वीवीआईपी समय है यह
जहां कॉमन हैं मित्‍तल, अंबानी और टाटा होना
जबकि आम आदमी का मतलब मैंगो पीपल है
जो इस समय 32 रुपये रोज खर्च करता है.

उल्‍टा घूम रहा है समय चक्र
5 रुपये में मिलती है अब सफेदी
और बाबू से भी कम दामों में
चुंधिया जाती है मंत्री की आंखें.

इंस्‍टंट है समय
3 जी में बिजी
कभी फ्लैट
कभी वोलाटाइल
तो कभी
पृथ्‍वी से भी तेज भागता
ब्‍लेड की तरह धारदार
चलता है सटा-सट
और पहुंच जाता है ग्रीन जोन में
सेंसेक्‍स की तरह.
ग्रोथ के माथे पर
गरीबी का लालचट्ट तिलक करता हुआ.

वर्चुअल समय
टच स्‍क्रीन में जीता है जिंदगी
और क्‍लिक में
प्राप्‍त करता है मोक्ष.

मौन है ये समय, शोर से भरा हुआ
या कह लें मौन के शोर में डूबा हुआ
इशारों से आवाजों को दबाता
विचारों को दांतों से पीसकर
शून्‍य होता
और इतिहास को गलाकर
मुंह पर मलता
होता एकदम सपाट.. !!

9 comments:

Madhukar Panday said...

Bahut hi Samyik, Sashakt evam Sanvedanshil Tippani....Aaj ke Bharat ki manodasha ko bahut hi sahi shabdon mein chitrit kiya hai....Badhaaiyan..

Dhananjay kumar said...

अच्छी है.समय से परिचय कराती समसामयिक है ये कविता!सोनु जी को अच्छी कविता के लिए बधाई!ऎसे ही लिखते रहें

Atul Joshi said...

Satya kahane ka sahas or salika,
bahot khub...

Evolutionz Revolution said...

Badhiya sirjee! Aise hi likhte rahiye!

अविनाश said...

क्‍या बात है ... सही वक्‍त पर बहुत शानदार तरीके से आपने कुछ जरूरी चीजों को कविताई में पिरोया है। बहुत बधाई।

VIJAI SINGH said...

Behatreen kavita hai sonu.... ekdam prasangik aur samsaamyik hai aaj ke daur ke liye. ye kavita jahan ek aur shasak varg ki asamvedansheelta ko sashakt roop se ujaagar karti hai wahi doosri aur jeevan ke prati aapki samvedanaa ko bhi abhivyakt karti hai.

...umeed hai bhavishya me bhi aapse aur kavitayen padhne ko milengi... meri shubhkaamnayen sweekaren...
Ishwar aapke sath rahe.
shubhakankshi
Vijai Singh

Alok Mishra, Journalist said...

अच्छा प्रयास है, लगे रहो भाई! आज के समय में बेहद प्रासंगिक भी है. कहानी भी पढने का सौभाग्य प्रदान करें.

Anonymous said...

aaj ke daur ke liye ye kavita ekdum sahi baiththi hai....kaash ye kavita sarkar tak pahuche aur unki aankhen khulen....aur vo mango ppl ko apne mehangaai ke chaaku se kaatna band kar de....

Deepa Nigam said...

aaj ke daur ke liye ye kavita ekdum sahi baiththi hai....kaash ye kavita sarkar tak pahuche aur unki aankhen khulen....aur vo mango ppl ko apne mehangaai ke chaaku se kaatna band kar de....